Monday, February 21, 2011

मैं क्या करती हूँ



ये किस उम्मीद पर जी रही हूँ मैं
किसके वास्ते यहाँ खरी हूँ मैं
कौन है जो पुकारता है मुझे
किसकी आवाज पर थम गई हूँ मैं
क्यों रोकता है बार-बार उसका प्यार मुझे 
क्यों एहसास बनकर उतर गया है रूह में मेरी
क्यों चाहती है आँखें दीदार उसका
क्यों ख्यालों में उसके गुम हो गयी हूँ मै
ढूंढ़ती हूँ खुद को या उसकी  तलाश करती हूँ
 जानेमै जिंदगी के हर पल में क्या करती हूँ
जवाब ढूंढ़ती हूँ अपने सवालों का
या जवाबों में सवाल धुध्ती हूँ
अजीब उलझनओ के बीच ये जिंदगी खरी है
और मै इन्ही उलझनओ के बीच,
जिंदगी तलाश करती हूँ
कभी दूर से तो कभी करीब से,
मैं उस वक़्त को देखा करती हूँ
जब तुमने पूछा था
"मैं सुबह से रात तक क्या करती हूँ"

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